हौसला!!!

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समय के काल में खोया हुआ हृदय

निर्झर आँखें, मलिन मन

अँधेरों के आगे की इक वो रौशनी

वो हौसला!!!

विचलित मन, उदास आत्मा

सूना संसार,हर पल कठिनाइयाँ

जिंदगी की उलझने, थका हुआ शरीर

फिर भी मुस्कुराने कीगयी हर एक कोशिश

वो हौसला!!!

ना भाग्य का चमक,

ना अपनों का धमक,

सूनेपन में भी एक स्थिरता की गूँज

वो हौसला!!!

परिवार की जिम्मेदारियाँ,

पैसों का अभाव,

फिर भी मेहनत से सब पूरा करने की लगन,

वो हौसला!!!

खुद को खुद से बेहतर बनाने का आगाज़,

हर दर्द की टीस पे मुस्कुराने का अंदाज,

कभी हार ना मानने का हर वो प्रयास,

वो हौसला!!!

Maid(a)-The Male Maid

Its was 9:30 AM, Someone knocked on the door, the two lazy IT lads shiv and Abhishek was sleeping as usual. Abhishek looked at shiv by one eye opened , shiv opened the door.

The person who knocked was Deepak , he asked very politely sir you required a maid, both IT lads eyes sparkled in joy since they have fired the old maid last week and they were not getting the new one. Both told in sync, yeh off course!!!

shiv asked deepak ,where is the maid since deepak was 22 year old young and new watchman of our society who works in the night shift and his duty gets over at 7:00AM.

Deepak  smiled and told , sir I am your new maid(a) . I will do all the work that maid do and better than normal maid and in less pay. Both(shiv&Abhishek) laughed  and asked deepak why you want to do another job while one is working . Deepak replied, sir i am B.A in English but i could not get good job . Apart from the watchman’s job , i work as a support staff in a small company  in which i need to communicate in English,Hindi and Marthi. In urge of better life and quick grow i want to work more . Whatever work i will get ,i will do irrespective of nature and i will do with my whole potential in best manner that  i can do. Moreover , I had a love marriage just one year back in which both families (bride and grooms)  not approved.But i love my wife very much and i want to give all the happiness to her.

Shiv and Abhishek  was astonished. They become speechless and felt so much  positive energy in Deepak to achieve good and greater things in life by hard work with self respect. They approved and  told deepak welcome to our house maid(a).

From the same day ,he started working. He cleans whole house, utensils,washrooms very nicely. He folds blankets and mattress, align the messy tables ,kitchen and everything.we were so happy and feel very positive like we are in a new house. He was very punctual,he does not take any leaves.

This cycle went for more than 1.5 Months.But suddenly for 6 days he was not at work. we were worried and asked his fellow watchman’s since he was not picking the phone.They told that his wife is ill. After 2 days he came back and asked for help . He needs money and it will be nice if  we pay 3 months of his salary. He told, he feel sorry to take money like this because this money is very less compared to what work he has done but he need for his wife.

Both shiv and abhishek decided to give money to deepak since he is in need and its good thing to help the needy. After one week we tried to call on the number he gave and his wife picked up the phone and told deepak went for work . But we told deepak is not here and gave our address, she replied deepak does not work there and when we asked how are you now.she told she was never ill .It was very surprising. Deepak never returned neither as watchman nor as maid(a).May be he has got another opportunity.But he should not had lied.

In the world of greed you don’t know whom we should trust and whom not. Sometimes you feel doing good is not good or people forget values of life for quick success. But life does not runs on bad lessons.The duration  he worked here the best he has given. No one has worked so responsibly and hard as deepak  in that profession in our experience.That’s why we still remember “(Maid(a)). ”

 

 

मैं बदल रहा हूँ

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मैं बदल रहा हूँ ,

कल जो मैं था वो शायद आज नहीं हूँ,

और जो मैं आज हूँ शायद वो कल नहीं रहूँगा

पता नहीं मुझे

पर शायद मैं बदल रहा हूँ,

या मैं बदल गया हूँ

पता नहीं मुझे

या फिर से बदलूंगा

पता नहीं मुझे

 

कल मैं तितलियाँ पकड़ता, घर  के बगीचे के पत्ते तोड़ता छोटा सा बच्चा था

नटखट सा चंचल सा

थोड़ा सच्चा सा थोड़ा कच्चा सा

अपनों के प्यार में पिरोया हुआ

माँ के गोद में महफ़ूज़

मुस्कराता सा, ख़ुश सा,

सिकन्दर की तरह दुनियां जीतने का सपना था

अपनापन था ,घर था,माँ के हाथ का खाना था

पापा की डांट भी थी

माँ का प्यार था

बहनों  का रुठना और मनाना

नानी का आँचल और मामाओं का दुलार

नाना जी की रेडियो पे बीबीसी न्यूज़

दादा जी के दिवाली के पटाखे का उपहार

ओर बुआ की चुगली

 

हलुवा थी, पूड़ी थी,चीनी भरी हुई रोटी थी,

सुबह की आँख खुलने पे मिलने वाली चाय थी

आलू का भुंजीया और गरम गरम पूड़ी थी

होली के रंग थे,

दिवाली के बम थे

राखी का धागा था

रसगुल्ला आधा आधा था

जीवन में चैन थी,

सुकून की नींद थी,

सुख भरी बातें थी

प्यार भरी थपकियां थी

त्यौहारों पे नए कपड़ों की आस

तैयार होके बन-ठन के घुमने का हमारा मिज़ाज !!

 

धूप की गर्मी थी

और पीपल का छांव भी

कुँए का पानी था

मोमबती की लाइट थी

खटिया की अकड़ थी

मिट्टी की ख़ुशबू थी

चाँद थे ,तारें थे,

और परियों की कहानियाँ भी !!!

 

पर आज शोर है, भीड़ है ,अकेलापन है

शोर और भीड़ में अकेलापन है

आईने और सपने दोनों पे धूल जमी है

कभी आईने की तरह सपने टूटे हैं

तो कभी सपनों के गुस्सा में आईना

मतलब,फरेब,झूठ के  चंगुल में लड़खड़ा रही है ज़िंदगी

पता नहीं कहाँ ,किस ओर ले जा रही है ये ज़िंदगी !!!

 

दूसरे की तरह देख देख कर चीज़ें करते हैं अब

इन्सान का कन्धा अब सीढ़ियों की तरह इस्तेमाल करते हैं अब

शायद जितना जरूरत है बस उतना ही बोलते हैं अब

हर शब्द तौलते हैं,बिना हिचकिचाहट के झूठ बोलते हैं अब

मन में क्या, मुँह में क्या शायद  खुद से भी हो गए हैं परे

खुद्दारी,भरोसा,इंसानियत, दोस्ती,प्यार पता नहीं ये कब के मरे

अब शायद फर्क नहीं पड़ता किसी के जीने और मरने में

हम शायद व्यस्त हैं अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने में !!!

 

रातें अकेले होती हैं,

आँसू से तकिये गीले होते हैं,

दिल टूटा होता है

कभी ख़ामोशी होती है

कभी मायुसी होती है

कभी गुस्सा होता है

कभी नफरत होता है

कभी दर्द होता है

कभी तन्हाई होती है

कभी किसी से दो पल बातें,प्यार की उम्मीद  होती है

तो कभी इंतज़ार की घनी काली रातें होती है!!!

 

घर नहीं, मकान नहीं ,अब तो हवेली होती है

और हर बात अब बात नहीं ,अब केवल बकचोदी होती है

आस पास जो रहते हैं वो अब जानते नहीं हैं हमें

अपने भी अब लगने लगा है कम मानते हैं हमें

रातें भी अब खो गयी हैं

पता नहीं नींद भी कहाँ सो गयी है

न भूख लगती  है न प्यास

न ही अब कोई जीवन में आस

गुम सा हो गया हूँ

कभी अपनी उलझनों में

तो कभी दूसरों के उलझने बनाने में

भटक  सा गया हूँ

ख़ुद को समझने में, चीजें भुलाने में

पर पता नहीं मुझे अब कहाँ हूँ मैं

लेकिन ऐसा लगता है अब  बड़ा हो गया हूँ मैं

मगर किसमें ?

शायद दुनियांदारी में, होशियारी में,ज़िम्मेवारी में, उधारी में

और शायद समझदारी में भी !!

 

शायद मैं बदल रहा हूँ,

या मैं बदल गया हूँ

पता नहीं मुझे

या फिर से बदलूंगा

पता नहीं मुझे

पता नहीं ये बदलाव सही है या गलत

ये बदलाव मुझे कहाँ ले जा रहा है

सही की तरफ या गलत की तरफ

मुझे ये भी नहीं पता

ये बदलाव मुझे मजबूत बना रहा है या कमजोर

मुझे ये भी नहीं पता

ये बदलाव मुझे सच्चा बना रही है या झुठा

मुझे ये भी नहीं पता

आज का बेबस या  कल का समझदार

मुझे ये भी नहीं पता

उम्मीद बस इतनी है मैं ये समझ पाऊं…

अपना आज और अपना कल बदल पाऊं…

इंसानियत

अंधेरा था

और तुम चुपचाप बैठे थे

सिर्फ सन्नाटा ही सन्नाटा था

आंसू टपक रहे थे

कमीज़ गीली हो रही थी

सिर्फ मायुसी थी

किस्मत ज़िन्दगी खुशियों उम्मीदों  को ग्रहण लगा था

तब तुम्हारे कंधे पे किसी ने हाथ रखा

अचानक से ये अहसास हुआ कि कोई है

जो तुम्हारी फ़िक्र करता है

उसने बे मतलब ही तुम्हारे आँसू पोंछ दिया

तुमको गले से लगाया और बोला

मुझे ये नही पता क्या कारण है

मुझे शायद इसमें दिलचस्पी भी नहीं है

पर शायद तुमको देख के लगा

मुझे आगे आके तुम्हारे कंधे पे हाथ रखना चाहिए तुमको अच्छा लगेगा

शायद तुम्हारे आंसू भी पोंछने चाहिए

ओर गले लगा के ये भी बोलना चाहिए

कि सब ठीक हो जायेगा

 

ना ना वो कोई सगा वाला नहीं था

कोई खून का रिश्ता भी नहीं था

वो न मेरा भाई था, न मेरा दोस्त,

न हमउम्र …और न ही मेरा प्यार

न वो मेरे जाति का था

न ही मेरे धर्म का

पर शायद वो इंसान था

और  शायद यही सच्ची इंसानियत थी

जो गुम हो गयी है ,कहीं खो गयी है

न वो कहीं मंदिरों में मिलती है

न ही कोई मस्जिदों मे

और न ही ऊपर वाले के किसी भी आशियाने मे

वो एक पल में इंसानियत का पाठ पढ़ा गया

अपने और पराए में भेद सिखला गया…

ठानी है आज कुछ कर गुजरने की…

ठानी है आज कुछ कर गुजरने की
कुछ सपनें और कुछ ख्वाहिशों को पुरा करने की
वक्त का सितम चाहे जो भी हो
नदी से समंदर में मिल फिर मचलने की

ठानी है आज कुछ कर गुजरने की
सूरज सा जलने की
पंछी सा उड़ने की
हवाओं का रूख मोड़ने की
परिस्थितियाँ चट्टान बने तो उनको भी तोड़ने की

ठानी है आज कुछ कर गुजरने की
रातों को जागने की
मंजिल से आगे भागने की
पुरुषार्थ को करने की
हर हार को जीतने की

ठानी है आज कुछ कर गुजरने की
सत्य पे चलने की
सामर्थ्य बनने की
अंधेरे में जलने की
रौशनी सी बढ़ने की

ठानी है आज कुछ कर गुजरने की
भाग्य से लड़ने की
किश्मत को पटकने की
दुःखों पे हँसने की
सुख में भी शून्य रहने की
ठानी है आज कुछ कर गुजरने की

अब अँधेरों से डर नहीं लगता…

अब अँधेरों से डर नहीं लगता…
क्योंकि हर रात काली
और ईंसान की हर बात काली
नज़र काली,ज़बान काली
दोस्ती काली,दुश्मनी काली
दवात काली और स्याही भी काली
अब अँधेरों से डर नहीं लगता…

क्योंकि पत्थर का, या दिल काला
या पत्थर दिल का रंग काला
काज़ल का और आँखों का रंग काला
और आँखें जिसमें काज़ल लगी है
उसके इश्क का ढंग काला
झूठ की दलीलें भी काली हैं
और कोट का रंग भी काला है
अब अँधेरों से डर नहीं लगता…

दूनियाँ की नज़र में मोहब्बत काला
माशूक़ा के लिए लिखे हर नज़्म का रंग काला
इश्क में सूखा हुआ हर गुलाब काला
राधा का श्याम काला
नाशिक में अब राम भी काला
अब अँधेरों से डर नहीं लगता…

गंगाजल का रंग काला
यमुना माँ का आँचल काला
आखिरी मँजिल का क़फन काला
यमराज काला,श्मशान में इंसान का राख काला

और हर औरत को पर्दा दिलाने वाला या उसके बराबरी के हक़ से रोकने वाला उस हिज़ाब का रंग भी काला…

अब अँधेरों से डर नहीं लगता…

क्योंकि हर ईमान काला,इंसान काला
और अब हर भगवान भी काला…

Ek ummeed…

kal wo aa rehin hain milne mujhse ,ek ummeed …
aapne saath aam aur mirchi ke aachar bhi layengi,
durga ashtmi ka prasad bhi layengi,
jinhone mere liye naye jeans aur shirt kharide honge
jinhone nimki,thekuwe aur chura fry bhi banaye honge
kal wo aa rehin hain milne mujhse ,
ek ummeed …

kal wo aa rehin hain milne mujhse ,ek ummeed…
jo tawe pe garam phulke banyenge
phir ghee me chupod ke plate me parosengi
plate se utha ke mere muh me bhi khilayengi
kitchen ke sare dabbe sajayengi
phir mera zid karne pe mera favourite sattu aur aaloo ke parath,kheer,sevai
mere kamine doston ko bhi khilayengi
kal wo aa rehin hain milne mujhse ,
ek ummeed …

kal wo aa rehin hain milne mujhse ,ek ummeed…
jo mere dono kano ko chu kar usske maail nikalengi,
jo mere badhe huwe baal pe daant lagayengi,
jo mere haath aur paon ke nails ko katwengi
jo mere sar me sone se pehle teel layengi
jo mere sare kadpde almari me sajayengi
aur mere thankne ke baad mere dono paaon bhi dabayengi…
kal wo aa rehin hain milne mujhse ,
ek ummeed …

kal wo aa rehin hain milne mujhse ,ek ummeed…
jo mere khusi ke liye har mandir,mazar aur gurudware pe sar jhukati hain
jo har pandit,fakir aur bhikhari ko mere ashirwad ke liye  har baar bhar bhar ke  daan deti hain
jo har mahine me mere liye  anginat upvas rakhti hain
jo mera maan ghabrarane pe shiv ji ka babhut mujhe lagati hain
usse bhi theek nehi huwa to mazar pe sar jukwati hain
aur bayen baju pe aur gale me tabbiz bhi pehnati hain
kal wo aa rehin hain milne mujhse ,
ek ummeed …

kal wo aa rehin hain milne mujhse ,ek ummeed…
jo bachpan me ek sari pehan paise bachati theee aur uss paise se mujhe tution padahte theen
jo khud bhooka rah ke mujhe khana khilati theen
jo khud thand me kikud kar mujhe chadar odahti theen
jo bizali jane ke baad hath wale pankhe se hawa kar ke mujhe sulati theen
kal wo aa rehin hain milne mujhse ,
ek ummeed…

kal wo aa rehin hain milne mujhse ,ek ummeed…
jo jati,dharam,rang,bhasa ka koi bhed nehi karke ke mere pyar ko apnanti hai,
jo mera dil toone ke baad mujhe sambalti hain
samjahti hain,mujhe manati hain aur hasati hain ,ek nayi aas bhi dilati hain
mere rone pe wo roti hain ,mere hasne pe wo hasti hain
khud bimar rah ke bhi mere preshan na hone ke liye phone pe kuch nehi batate hain
kal wo aa rehin hain milne mujhse ,
ek ummeed…

kal wo aa rehin hain milne mujhse ,ek ummeed…
jinhone zindgi ke sare kast sirf mere khusi ke liye uthaye hain
jinhone sare kamaye huwe paise sirf mere tarakki ke liye lagaye hain
jinhone aapni aadhi neend mere tabiyat aur padahai ke liye jag jag kar udayeen hain
jinhone aapni khoon,passene,aas aur ummed se meri zindgi banaye hai
maine aasman wale bhagwan ko nehi dekha
per kal meri bhagwan aa rehi hain
kal meri maa aa rehi hain
kal meri ummed aa rehi hain…….