और चल दिये

और चल दिये
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ज़िन्दगी में आए, उम्मीदें जगाये
खुब मुस्कुराये, कहकहे लगाये
दीया बने, खुब जगमगाये
हर दीया बुझाया ,और चल दिये

वक़्त ने किया मुकम्मल कोशिशें
वक़्त में गिरे, ठहरे और उठे
वक़्त को ज़िया, वक़्त को पिया
वक़्त को वक़्त का मरहम लगाये, और चल दिये

यादों की कविताएं बनाये
बातों की कहानियाँ लिखें
समय के घोंसले में अपना संसार सजाया
ज़िन्दगी को गीत सा गुनगुनाया ,और चल दिये

ज़िन्दगी के आग को ज़िन्दगी में जलाया
हर लौ में ख़ुद को तपाया
कोशिशों की आग में खुद को सुलगाया
हर वो आग बुझाए ,और चल दिये

कई बार ज़िन्दगी के राहों में ख़ामोशी खड़ी थी
ख़ामोशी को रिश्तों की आवाज़ सुनाया
हर किसी को अपनाया, समझाया, सुलझाया
हर उस बोझ का बस्ता उठाया ,और चल दिये